हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वील ए फ़कीह के प्रतिनिधि, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस अवसर पर जारी अपने विशेष संदेश में पूरे भारत की जनता, धार्मिक नेताओं, उलेमा, बुद्धिजीवियों तथा शैक्षणिक और सांस्कृतिक हस्तियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और एकता, भाईचारे, आपसी सम्मान तथा मानवीय मूल्यों को मज़बूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत क़ुरआन मजीद की इस आयत से की:
“وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا वअतसेमू बेहब्लिल्लाहि जमीअन वला तफ़र्रेक़ू।”
अर्थात, “सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लो और आपस में विभाजन में न पड़ो।”
उन्होंने कहा कि पैग़म्बर-ए-अज़म हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम का शुभ जन्म उस महान पैग़म्बरी मिशन की याद दिलाता है, जिसका उद्देश्य पूरी मानवता को ईमान, ज्ञान, अच्छे आचरण, न्याय, भाईचारे और मानवीय गरिमा की रोशनी से परिचित कराना था। पैग़म्बर-ए-रहमत सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम ने अपनी पवित्र जीवन-शैली के माध्यम से प्रेम, शांति, आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का ऐसा मार्ग दिखाया, जो आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हकीम इलाही ने हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के जन्म को ज्ञान, समझ और बुद्धिमत्ता के प्रसार का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि मक्तब-ए-जाफ़री ज्ञान, नैतिकता और मानवीय शिक्षा की महान परंपरा का संरक्षक है और आज के समय में इसकी शिक्षाओं की ओर लौटने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
उन्होंने एकता सप्ताह को इस्लामी उम्मत की साझा बुनियादों को मज़बूत करने और मुसलमानों के बीच भाईचारे तथा आपसी सद्भाव को बढ़ाने का अनमोल अवसर बताया। उन्होंने कहा कि आज जब कुछ तत्व मतभेदों और फूट का लाभ उठाकर समाज और मानवता की बुनियादों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, तब संवाद, आपसी सम्मान, सहयोग और एकता की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है।
संदेश में भारत की महान धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा देश की उन्नति और विकास में मुसलमानों की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया गया। साथ ही उलेमा, बुद्धिजीवियों तथा धार्मिक और सांस्कृतिक हस्तियों से अपील की गई कि वे बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के साथ एकता और एकजुटता को मज़बूत करें तथा नई पीढ़ी को पैग़म्बर-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की प्रकाशमय जीवन-शैली, इस्लामी शिक्षाओं और उच्च मानवीय मूल्यों से परिचित कराएँ।
इस अवसर पर रहबर-ए-मुअज्ज़म-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद मुजतबा ख़ामेनेई की ओर से भी भारत के धार्मिक नेताओं, उलेमा, बुद्धिजीवियों तथा धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक हस्तियों को शुभकामनाएँ दी गईं। उनके लिए सम्मान, सफलता और उच्च मानवीय उद्देश्यों की सेवा करने की तौफ़ीक़ की दुआ भी की गई।
संदेश के अंत में भारत की पूरी जनता को एक बार फिर इस मुबारक अवसर की बधाई दी गई और दुआ की गई कि अल्लाह तआला पैग़म्बर-ए-रहमत हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म के सदक़े लोगों के दिलों को एक-दूसरे के क़रीब करे, इस्लामी उम्मत को सम्मान और उन्नति के मार्ग पर दृढ़ बनाए रखे तथा महान भारतीय समाज को ज्ञान, ईमान, अच्छे आचरण, सद्भाव और विकास की नेमतों से भरपूर करे।
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